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जीवन में विनम्रता का भाव हो



तमिलनाडु सेलम

तेरापंथ धर्म संघ के प्रमुख आचार्य महाश्रमण ने गुरुवार को कहा कि जीवन में विनम्रता का भाव होना चाहिए। ईरोड से सेलम की ओर विहार कर रहे आचार्य ने उप्पुपालयम स्थित वाणी इंटरनेशनल स्कूल में धर्म संघ के मंत्रीमुनि सुमेरमल लाडनूं की स्मृति सभा को संबोधित करते हुए कहा कि मंत्रीमुनि काफी विन्रम थे। आचार्य ने कहा कि उन्होंने मंत्री मुनि के प्रवचनों से प्रेरित होकर ही दीक्षा ली थी। मुनि सुमेरमल ने ही उन्हें दीक्षा प्रदान की थी लेकिन आचार्य होने के बाद भी जब वे मुनि सुमेरमल के दर्शन करने जाते थे तो वे खुद आगे आकर स्वागत करते थे। आचार्य ने कहा कि हम में ऐसी ही विनम्रता होनी चाहिए। आचार्य ने कहा कि उन्होंने तीन चातुर्मास मंत्री मुनि के साथ किए थे। आचार्य ने कहा कि मंत्रीमुनि ने जीवन के पहले दशक में दीक्षा ग्रहण की। मुझ पर उनका बहुत बड़ा उपकार है। एक छोटे से बालक को उन्होंने कल्याण का मार्ग दिखाया। बचपन में अनुशासन प्रियता के साथ-साथ मुझ पर वे बहुत वात्सल्य भी रखते थे। आचार्य ने मंत्री मुनि को दूरदर्शी और अत्यन्त प्रभावशाली व्यक्ति बताते हुए कहा कि उनके आकस्मिक प्रयाण से धर्मसंघ में रिक्तता आई है। सभी साधु-साध्वी एवं श्रावक-श्राविकाओं ने चार लोगस्स का ध्यान कर उन्हें भावांजलि दी। मुख्य मुनि महावीर कुमार, साध्वी प्रमुखा कनकप्रभा, मुख्य नियोजिका साध्वी विश्रुतविभा, साध्वी संबुद्धयशाजी सहित अन्य मुनियों व साध्वियोंने मंत्री मुनि के जीवन से जुड़े संस्मरण सुनाए और उनके जीवन पर प्रकाश डाला। साथ ही कोलाकाता में मंत्रीमुनि के लगातार पांच साल के चातुर्मास और उनके ज्योतिष ज्ञान की चर्चा की।