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मुमुक्षु किरण बहन प्रजापत



मध्य प्रदेश - रतलाम - बाजना


ग्राम के इतिहास में पहली बार मालव भूषण आचार्यश्री नवरत्न सागरजी के शिष्य आचार्यश्री विश्वरत्न सागरजी, मृदुल रत्न सागरजी के सान्निाध्य में चल रहे दीक्षा महोत्सव के सातवें दिन मंगलवार को अजैन मुमुक्षु किरण प्रजापत का वर्षीदान वरघोड़ा निकला। वरघोड़े में बड़ी संख्या में सभी धर्म-संप्रदाय के अनुयायियों ने शामिल होकर दीक्षार्थी की अनुमोदना की। दीक्षार्थी किरण ने सुसज्जित रथ में सवार होकर मुक्तहस्त से सांसारिक वस्तुएं लुटाई, जिसे पाने के लिए धर्मालुओं में होड़ मची रही।


वरघोड़ा ग्राम के प्रमुख मार्गों जैन मंदिर, सदर बाजार, अम्बे चौक, राजपूत मोहल्ला होते हुए जैन मंदिर पहुंचकर धर्मसभा के रूप में परिवर्तित हुआ। धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्यश्री विश्वरत्न सागरजी, मृदुल रत्न सागरजी ने वर्षीदान का महत्व बताते हुए कहा कि भगवान महावीर ने भी दीक्षा अंगीकार की। उस समय भी इंद्र महाराज द्वारा प्रभु का वर्षीदान वरघोड़े का आयोजन किया गया था। वीर के 2600 वर्ष के शासन के बाद भी इस तरह के आयोजन होते आ रहे हैं। दीक्षार्थी किरण प्रजापत की दीक्षा संयम विधि बुधवार सुबह 7 बजे से प्रारंभ होगी। 10 बजे तक मुमुक्षु किरण का नाम, पता, एड्रेस, ड्रेस, परिवार, माता-पिता सब बदल जाएंगे। सिर्फ एक साध्वी के रूप में आपके सामने होगी।


मन को गंगा की तरह निर्मल बनाएं


प्रवचनकार मुनिश्री तीर्थरत्न सागरजी ने कहा कि संसार में दो व्यक्ति रहते हैं। एक पकड़ने वाला एक छोड़ने वाला है। आप पकड़ने में लगे हो कि छोड़ने में। बहन किरण ने सांसारिक वस्तुओं को छोड़ा है। आप क्या कर रहे, उन्हें पकड़ रहे हैं। आप ज्यादा खुश है कि बहन किरण। पुण्यशालियों आप मन को गंगा की तरह निर्मल कर लो तो भगवान के पीछे नहीं भागना पड़ेगा। भगवान आपके पीछे आएंगे। जो इकट्ठा करने में आप लगे हो, उसको त्याग कर परमात्मा के पद पर निकल जाओगे तो तर जाओगे।


किरण ने बढ़ाया बाजनावासियों का मान


मुमुक्ष किरण बहन ने गजराज पर बैठकर वरघोड़े में सांसारिक वस्तुओं का त्याग कर एक-एक वस्तु अपने हाथ से दान स्वरूप लोगों को वर्षीदान के माघ्यम से दी। जगह-जगह चौराहे पर जैन-अजैन गांव की लाडली का


दीक्षा वरघोड़ा देखकर भाव-विभोर हो गए।


दीक्षार्थी बहन के उत्साह को देख हुए भाव विभोर


वर्षीदान वरघोड़ा में बहन किरण ने पूरे समय आमजन के वंदन का अभिनंदन कर खुले हाथों से सांसारिक वास्तुओं को दान किया। मुमुक्षु से प्राप्त सामग्री, वस्तु, रुपया-पैसा को आमजन ने मस्तक पर लगाकर वंदन किया।


सांस्कृतिक कार्यक्रम में मोक्ष का मार्ग बताया


वर्षीदान वरघोड़ा दिवस की पूर्व संध्या पर जैन उपाश्रय में श्राविकाओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रम के माध्यम से दीक्षा के महत्व व मोक्ष कल्याण मार्ग के मार्मिक संदेश दिए। इससे जहां परिवार जन की आंखें नम हुई, वहीं दीक्षार्थी सांसारिक जन को देख-देख मुस्कुराई।


दीक्षार्थी बहन का बहुमान


भुवासा तहसील खाचरौद से बाल मुनि रभ्यरत्न सागरजी की सांसारिक माता सुगन कुंवर, पिता ठाकुर भंवरसिंह राठौर, काका विजयसिंह राठौर ने दीक्षार्थी बहन किरण का बहुमान किया। जिसकी श्रीसंघ ने खूब-खूब अनुमोदना की। भगवान को रथ में लेकर बैठने के लाभार्थी मनीष कुमार, अमित कुमार कावड़िया परिवार रहा। चवर डुलाने के लाभार्थी महिपाल कोठारी परिवार रहा। बड़ी आरती के लाभार्थी ऋषभ मूणत परिवार, मंगल आरती के लाभार्थी मुमुक्षु किरण के सांसारिक परिवार के मांगीलाल प्रजापत परिवार रहा।


मुमुक्षु किरण का परिचय


बाजना निवासी शंकरलाल-हीराबाई प्रजापत के यहां जन्मी किरण ने कक्षा सातवीं तक ग्राम के शासकीय कन्या माध्यमिक विद्यालय पढ़ाई की है। परिवार में भाई कान्हा और भाभी हेमा है, जिनका विवाह हाल ही में 14 अप्रैल 2019 को सरदारपुर में हुआ। किरण जनवरी 2018 को साध्वी सिद्धांत ज्योति श्रीजी के संपर्क में आई, तभी से किरण के मन में दीक्षा के भाव जागृत हुए। बचपन से धर्म कार्य में रुचि लेने वाली दृढ़ इच्छाशक्ति वाली किरण 24 अप्रैल को बाजना में आचार्यश्री विश्व रत्न सागरजी की निश्रा में जैन भगवती दीक्षा अंगीकार करेंगी। मां हेमा बाई ने बताया कि बचपन से शादी नहीं करने व धर्म मार्ग पर जाने की जिद करने वाली किरण ने आज संसार के युवा वर्ग को नई दिशा दी है।


23 अप्रैल 2019 :

बाजना में दीक्षार्थी किरण को कार्यक्रम स्थल पर लाते परिजन।

बाजना में आयोजित दीक्षा महोत्सव में उपस्थित धर्मालुजन।

बाजना में गजराज पर सवार प्रसन्ना मुद्रा में दीक्षार्थी किरण बहन।

बाजना में सांसारिक परिवार के साथ आरती उतारती दीक्षार्थी किरण बहन।

बाजना में दीक्षार्थी किरण बहन के वर्षीदान वरघोड़े में शामिल धर्मालुजन।

वरघोड़े में भगवान का रथ खींचते युवा।


लाइन ऑफ कंट्रोल का रास्ता बताया

- आठ दिवसीय आचार महिमा महोत्सव


रतलाम। नईदुनिया प्रतिनिधि


पंन्यास प्रवर पद्मबोधी विजयजी ने आठ दिवसीय आचार महिमा महोत्सव के तीसरे दिन आचार्य के 36 गुणों का विवेचन करते हुए लाइन ऑफ कंट्रोल का रास्ता बताया। उन्होंने कहा कि जीवन में कई मौकों पर कभी नहीं, अभी नहीं और इतना नहीं का पालन करना चाहिए। लाइन ऑफ कंट्रोल का यही रास्ता है। इससे नौ बातों निद्रा (प्रमाद), क्षुधा (भूख), स्वाद, काम (इच्छा), द्वेष, संघ, संग्रह, नाम और शास्त्र पर भी विजय मिलती है।

पद्मभूषण आचार्यश्री विजय रत्नसुंदर सूरीश्वरजी के शिष्य पन्यास प्रवर पद्मबोधी विजयजी ने रुद्राक्ष कॉलोनी (लक्ष्मी नगर-हरमाला रोड) पर हो रहे महोत्सव में लाइन ऑफ कंट्रोल की विस्तार से व्याख्या की। श्री देवसुर तपागच्छ चारथुई जैन श्रीसंघ, गुजराती उपाश्रय व श्री ऋषभदेवजी केसरीमलजी जैन श्वेताम्बर पेढ़ी द्वारा आयोजित महोत्सव में उन्होंने कहा कि लाइन ऑफ कंट्रोल के लिए जब भी आचार के विरुद्ध कोई इच्छा हो, तो उसे कभी नहीं नहीं बोलने का भाव होना चाहिए। कोई साधु मर्यादा के विपरीत यदि रात्रि में गौचरी (भोजन) लेने आए, तो उसे जिस प्रकार कभी नहीं कह सकते हो, वैसे ही घर में भी कोई सदस्य रात्रि भोजन त्याग की दशा में भोजन का कहे, तो उसे कभी नहीं कहना आना चाहिए। कई मौकों पर आचार्य के लिए और कई मौकों पर जिस प्रकार कभी नहीं कहना जरूरी है, वैसे ही श्रावक-श्राविका के लिए भी यही जरूरी है। इसी प्रकार कुछ मौकों पर अभी नहीं कहना आवश्यक है। दीक्षा भी ऐसा प्रसंग है, जिसके लिए कभी नहीं के बजाए अभी नहीं का भाव रख सकते हैं। साधु नहीं होंगे, तो व्यवस्था नहीं चलेगी। इसलिए मौका मिला, तो दीक्षा लेंगे, लेकिन अभी नहीं कह सकते हैं।


समूह सामायिक आज


पन्यास प्रवरजी ने कहा कि कई कार्य जरूरी होते हैं, लेकिन जरूरी कार्य के लिए कभी नहीं, अभी नहीं ना हो सके, तो पाप के क्षेत्र में इतना नहीं पर अमल करना चाहिए। इन तीन बातों कभी नहीं, अभी नहीं, इतना नहीं से हम कई क्षेत्रों में विजय प्राप्त कर सकते हैं। आचार्य पद इतना आसान नहीं होता, जो इन सभी चरणों से गुजरता है, उसे ही ऐसा अवसर प्राप्त होता है। पन्यास प्रवरजी ने इस मौके पर 24 अप्रैल को आचार महिमा महोत्सव में होने वाली समूह सामायिक में अधिक से अधिक शामिल होने का आह्वान किया। समूह सामायिक के दौरान पद्मभूषण आचार्यश्री विजय रत्नसुंदर सूरीश्वरजी लॉयर्स ऑफ कंट्रोल पर प्रवचन देंगे। मंगलवार को लाभार्थी पुखराजबेन समीरमल ललवानी, प्रकाशचंद ललवानी महेंद्र ललवानी, कलावती खाबिया व चिराग राजेंद्र खाबिया का बहुमान किया गया। श्रीसंघ की ओर से अध्यक्ष सुनील ललवानी, अभय पोरवाल, राजेश जैन, सुनील भंडारी, अशोक भाणावत, उषा भंडारी, वंदना सुराना, जयश्री मूणत, सुनीता पोरवाल आदि ने बहुमान किया। युवा गायक अभिषेक जैन ने संगीतमय प्रस्तुतियां दी। संचालन श्रीसंघ उपाध्यक्ष मुकेश जैन ने किया। उन्होंने बताया कि आचार्य के 36 गुणों को दर्शाने वाली आर्ट गैलरी रुद्राक्ष कॉलोनी में 28 अप्रैल तक प्रतिदिन शाम 6 से 10 बजे तक खुली रहेगी।