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शरीर केवल साधन है, आत्मा साध्य


तमिलनाड़ु कोयंबटूर सेलम.

अहिंसा यात्रा के तहत विहार कर रहे तेरापंथ धर्म संघ के प्रमुख आचार्य महाश्रमण का रविवार को इस्पात नगरी सेलम में मंगल प्रवेश हुआ। आचार्य ने कहा कि शरीर केवल साधन है लेकिन आत्मा साध्य है, इसलिए आत्मा को प्रमुख बनाएं। जब कर्मो का उदय होता है तब कोई मित्र या रिश्तेदार साथ नहीं दे सकता। कर्मों का फल स्वयं को ही भुगतना पड़ता है, इसलिए कर्म अच्छे रखने का प्रयास करें जिससे आत्मा निर्मल बन सके।

आचार्य ने यह बात प्रवचन स्थल वरलक्ष्मी महल में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने शरीर व आत्मा के भेद को बताते हुए कहा कि शरीर प्रमुख रूप से तीन प्रकार के माने जाते हैं। औदारिक, सूक्ष्म व सूक्ष्मतर। उन्होंने कहा कि शरीर छूट जाता है लेकिन आत्मा स्थायी होती है। आत्मा को नष्ट नहीं किया जा सकता। उन्होंने श्रद्धालुओं को अंहिसा यात्रा का उद्देश्य बताए और नशा मुक्ति व नैतिक जीवन जीने का संकल्प भी कराया।

धर्मसभा को संबोधित करते हुए साध्वी क नक प्रभा ने कहा कि गुरु बिना व्यक्ति का विकास संभव नहीं है। व्यक्ति कितना ही ज्ञानी हो लेकिन जब तक वह गुरु की शरण में नहीं जाता वह अपने गुणों में निखार नहीं ला सकता है।

जन्मोत्सव व पाटोत्सव आज सोमवार से आचार्य का दो दिवसीय जन्मोत्सव व पाटोत्सव कार्यक्रम आयोजित होगा। कार्यक्रम में भाग लेने के लिए ईरोड, तिरुपुर, मदुरै, कोयम्बत्तूर, चेन्नई, बेंगलूरु, दिल्ली, हैदराबाद, कोलकाता आदि शहरों से श्रावक पहुंचे हैं।

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