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जैन समाज की पहल: बारिश के पानी के लिए मंदिर में बनाया अमृत कुंड़, इसी पानी से होगा भगवान का अभिषेक



मध्य प्रदेश - ग्वालियर

जैन समाज ने बारिश का पानी संयोजने की अनूठी पहली की है। नया बाजार स्थित जैन मंदिर में बारिश का पानी एकत्रित करने के लिए एक कुंड बनाया जा रहा है। इस कुंड में बारिश का पानी करीब 10 हजार लीटर एकत्रित किया जाएगा। इस पानी से मंदिर में विराजमान जैन भगवान का अभिषेक साल भर किया जाएगा। वहीं मंदिर पर आने साध्वी और संतों को आहार के साथ यही पानी ग्रहण करने को दिया जाएगा।


जैन समाज के संत अविचल सागर की प्रेरणा से मंदिर कमेटी ने मंदिर के अंदर अमृत कुंड बनाए जाने का प्रयोग किया है। यह अमृत कुंड में पानी लाने के लिए मंदिर के सबसे ऊपरी छत पर टीन शेड लगाया गया है। यह टीन शेड को पानी पाइप लाइन के माध्यम से जमीन के अंदर बनाए गए अमृत कुंड से जोड़ा गया। इन पाइपों में दो टोटी लगाई गई है। पहली बारिश का पानी में टीन शेड के ऊपर पक्षियों की बीट, धूल, मिट्टी आदि होने की वजह से उसे नाली में बहाया जाएगा। इसके बाद बारिश होने पर पानी को अमृत कुंड में टोंटी के माध्यम से छोड़ा जाएगा। इस तरह हर साल दस हजार लीटर मंदिर में उपयोग होने वाला पानी इसी कुंड से लिया जाएगा। इस कुंड से पानी निकालने के लिए एक मोटा पाइप लगाया गया है जिसमें छोटी बाल्टी डालकर पानी निकाला जाएगा। इसके बाद पाइप को ढक दिया जाएगा। इस तरह बारिश के पानी को हवा और धूप से सुरक्षित रखा जाएगा।


धूप और हवा से पानी होता खराब से अमृत कुंड राजस्थान प्रांत के कई शहरों में जैन मंदिरों में तैयार किए गए हैं। ग्वालियर शहर में पहली बार यह कुंड तैयार किया गया है। बारिश का एकत्रित किया गया पानी को हवा और धूप के संपर्क में न आने दिया जाए तो पानी खराब नहीं होता है। जब हवा और धूप के संपर्क में पानी आता है और उसमें कोई वस्तु आदि गिरती है तो पानी सडऩे लगता है। उसमें कीड़े पैदा होने लगते हैं।


अब एक लाख लीटर का तैयार होगा कुंड मंदिर के अंदर दस हजार लीटर की क्षमता का कुंड लगभग तैयार हो चुका है। मंदिर के पास ही विशाल संत निवास तैयार होने जा रहा है। यहां एक लाख लीटर क्षमता का कुंड तैयार किया जाएगा। इस कुंड के माध्यम से शुद्ध जल को संत एवं साध्वियों को जैन समाज द्वारा उपयोग के लिए पहुंचाया जाएगा। बताया जाता है कि मंदिर में तैयार होने वाले अमृत कुंड पर 60 हजार से अधिक का खर्च आया है।

बारिश का पानी सहेजने का प्रयोग शहर के लिए पहला है। जैन मुनि अविचल सागर के आदेशानुसार यह अमृत कुंड तैयार किया जा रहा है।