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जैन संतों का त्याग देखकर अजैन अल्पेश पटेल बन गए आदर्शरत्नजी


शहर में 2 जून से 5 दिनी गणिपद प्रदान कार्यक्रम होने वाला है। इसमें पाटीदार समाज से जैन मुनि बने आदर्शरत्नजी सागर को गणिपद दिया जाएगा। मुनिजन की तपस्या से प्रभावित होकर इन्होंने जैन संत बनने का निर्णय लिया। ये पहले ऐसे अजैन संत हैं जिन्हें दीक्षा प्राप्त करने के बाद सबसे कम 16 साल में ही गणिपद दिया जा रहा है। 6 जून को विश्वसागर महाराज व आचार्य मृदुरसागर इन्हें गणिपद प्रदान करेंगे।

मंगलवार को मुनि आदर्शरत्नजी सागर ने भास्कर से विशेष चर्चा की। बताया कि वे पाटीदार समाज से हैं और 12वीं तक अध्ययन किया है। उनका नाम अल्पेश पटेल था। वे अहमदाबाद में चायना के इलेक्ट्राॅनिक आइटम का व्यवसाय करते थे। 25 साल की उम्र में नवरसागरजी को अहमदाबाद में चातुर्मास के दौरान दोपहर में तेज धूप में नंगे पैर चलते देख मन में जैन संतों के प्रति आदर भाव उत्पन्न हुआ और मुनिश्री से मिले। तभी जैन संत बनने की मन में ठान ली। कार्य छोड़कर डेढ़ साल तक संतों के साथ रहे। उन्हाेंने कहा कि नवकार महामंत्र प्राप्त किया उसके बाद संतश्री ने मुझे जीवन के 7 पाप बताए और शहद को त्यागने का पच्चखाण करवाया। सांसारिक जीवन को त्याग कर संतों के संघ के साथ रहने लगे। तब पारिवारिक लोगों ने जैन संत बनने के जगह स्वामी नारायण से दीक्षा लेने को कहा पर मन में जैन संत बनने की ठान ली थी। डेढ़ साल तक संतों के साथ रहने के बाद धार में नवरसागरजी से दीक्षा ली। इसी दौरान उन्हें आदर्शरसागर महाराज की उपाधि मिली। इसके बाद 16 साल से जैन धर्म के सिद्धांतों को जन-जन तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं। कठोर तप व तपस्या करते हुए अब तक गुजरात, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, झारखंड, तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, राजस्थान में विहार यात्राएं की। जैन समाज के महेंद्र चौरड़िया ने बताया कि सागर समुदाय में 1100 संत हैं। इनमें करीब 11 संतों को गणिपद मिला है। जैन मुनि की दीक्षा प्राप्त करने के बाद सबसे कम समय 16 साल में एवं अजैन संत बने आदर्शरत्नजी सागर पहले संत हैं जिन्हें गणिपद मिल रहा है।

आदर्शरत्नजी सागर महराज जैन समाजजनों के बीच प्रवचन देते हुए।

तीन साल से ले रहे सिर्फ उबला आहार

आदर्शरत्नजी सागर महाराज साढ़े तीन साल से सिर्फ उबला आहार ले रहे हैं। इसके साथ ही दस साल से 24 घंटे में सिर्फ एक बार जल ग्रहण करते हैं। दीक्षा के पश्चात गर्मी हो या ठंड सिर्फ एक ही कपड़े का उपयोग कर रहे हैं। इसके साथ ही 2 वीसस्थानक तप, वर्षीतप, 62 वर्धमान तप की ओली, प्रतिदिन 6 से 7 घंटे जाप करते हैं।

मात्र 42 साल की आयु में गणिपद मिल रहा

सागर समुदाय की स्थापना 110 साल पहले आनंदसागरजी ने की थी जिसमें अब तक 1100 से अधिक संत हैं। आदर्शरत्नजी सबसे कम उम्र के पहले संत हैं जिन्हें मात्र 42 साल की आयु मे गणिपद मिल रहा है।

पिता व भाई करते हैं टाॅवर लगाने का काम

आदर्शरत्नजी के पिता हरिभाई पटेल, माता कांताबेन पटेल, भाई संजय पटेल, बहन रंजनाबेन पटेल हैं। पिता हरिभाई व भाई संजय अहमदाबाद में काॅन्ट्रेक्टर है जो शहर में टॉवर लगाने का काम करते हैं।