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इंदौर-कोटा के त्रिमूर्ति दिगंबर जैन मंदिर से तीन साल पहले हुई चोरी को आज तक नहीं ढूंढ पायी पुलिस

इंदौर-कोटा राजमार्ग स्थित क्षेत्र के प्रसिद्ध जैन तीर्थ त्रिमूर्ति दिगंबर जैन मंदिर से 14 अष्टधातु की मूर्तियों व अन्य कीमती सामग्री के चोरी होने की घटना को तीन साल बीत पूरे हो चुके हैं, किंतु पुलिस के हाथ में सुराग होने के बाद भी पुलिस ने अपराधियों को पकड़े बिना मामले में खात्मा लगाकर प्रकरण को ही समाप्त कर दिया है जबकि इस मामले से मध्यप्रदेश और राजस्थान के जैन समाज की भावनाएं जुड़ी हुई थीं।

28 जुलाई 2016 को मूर्ति चोरी की घटना सामने आने के बाद स्थानीय जैन समाज ने आंदोलन भी किया। धरना भी दिया, ज्ञापन भी सौंपे। इस दौरान राजस्थान के कई शहरों से आकर जैन समाज के लोगों ने आरोपितों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर आंदोलन में हिस्सा लिया। पुलिस के लिए चुनौती बने इस मामले में चोरी करने वाले अपराधी पुलिस से ज्यादा चालाक साबित हुए, जिनके आगे पुलिस ने हार मानकर मामले में ही खात्मा लगा दिया। चोरी की घटना के बाद समाजजन द्वारा किए गए विरोध प्रदर्शन के कारण उस समय यह मामला प्रदेश सरकार तक पहुचा था।


समाज के प्रतिनिधिमंडल ने तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान से भी मुलाकात की थी। उस समय मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया था कि जांच करके जल्द ही आरोपितों की गिरफ्तारी की जाएगी। जरूरत पड़ी तो राजस्थान पुलिस से भी सहयोग लेने की बात मुख्यमंत्री ने कही थी। इसी मामले में उज्जैन रेंज के आईजी ने दो बार घटना स्थल का दौरा कर समाजजन को आश्वस्त किया था कि पुलिस आरोपीयो तक जरूर पहुंचेगी।

14 में से 3 प्रतिमाएं मिली थीं, वो भी खंडित अवस्था


घटना के बाद हुए आंदोलन के चलते पुलिस दबाव में आई और उसके कुछ समय बाद तीन प्रतिमाएं लालूखेड़ी के यात्री प्रतीक्षालय से खंडित अवस्था में पुलिस को मिली थीं। इसके बाद मामले में आरोपितों तक पहुंचने की संभावना बनी थी। समय बीतता चला गया और पुलिस मामले की जांच में ढिलाई बरतती गई। धीरे-धीरे जैसे मामला ठंडा पड़ा कि पुलिस ने खात्मा लगा दिया।

यहां उल्लेखनीय है कि जांच में पुलिस को कुछ मोबाइल नंबर भी मिले थे जो वारदात वाली रात्रि में डाक बंगला क्षेत्र में सक्रिय थे। उन नंबरों से संबंधित सारी जानकारी पुलिस ने जुटाई थी। कुछ पुराने अपराधियों से भी छानबीन की थी लेकिन विशेष कारवाई नही हो सकी।


योगेन्द्रसिंह सिसौदिया, थाना प्रभारी सुसनेर ने कहा मामला मेरे कार्यकाल से बहुत पहले का है। तीन साल पुरानी चोरी की घटना के मामले में पुलिस द्वारा खात्मा लगाकर फाइल कभी की बंद कर दी गई है।